ज्यादातर यात्री इस उम्मीद में काफी पहले टिकट बुक कर लेते हैं कि समय रहते उनकी सीट पक्की हो जाएगी, लेकिन कई बार चार्ट बनने तक टिकट वेटिंग में ही रह जाता है. असल में कन्फर्म टिकट मिलना केवल भाग्य का खेल नहीं है, बल्कि इसके पीछे रेलवे के कुछ तकनीकी नियम और प्राथमिकताएं काम करती हैं.
बहुत कम लोग जानते हैं कि वेटिंग टिकट कितने प्रकार की होती है और किस वेटिंग लिस्ट से कंफर्म टिकट मिलने के चांस ज्यादा होते हैं. रेलवे की वेटिंग लिस्ट में जनरल वेटिंग लिस्ट (GNWL), रिमोट लोकेशन वेटिंग लिस्ट (RLWL), पूल्ड कोटा वेटिंग लिस्ट (PQWL) और तत्काल कोटा वेटिंग लिस्ट (TQWL) जैसी कई श्रेणियां होती हैं.
जनरल वेटिंग लिस्ट (GNWL) वेटिंग लिस्ट उस समय जारी की जाती है जब यात्री ट्रेन के ओरिजिन स्टेशन (जहां से ट्रेन शुरू होती है) से यात्रा कर रहा होता है. जैसे अगर आप दिल्ली से मुंबई जाने वाली ट्रेन का टिकट दिल्ली से लेते हैं, तो आपको GNWL मिलेगा. अगर आप उसी ट्रेन में बीच के किसी स्टेशन से टिकट लेते हैं तो आपको जनरल वेटिंग नहीं मिलेगा. इस वेटिंग लिस्ट के कंफर्म होने का चांस सबसे ज्यादा होता है.
रिमोट लोकेशन वेटिंग लिस्ट (RLWL) वेटिंग लिस्ट उन स्टेशनों से जारी की जाती है, जो ट्रेन के बीच के महत्वपूर्ण स्टेशन होते हैं. जैसे हावड़ा से दिल्ली की ट्रेन में अगर कोई व्यक्ति पटना से टिकट लेता है तो उसे RLWL वेटिंग टिकट मिलेगा. इस लिस्ट के कंफर्म होने के चांस GNWL से कम होते हैं.
पूल्ड कोटा वेटिंग लिस्ट (PQWL) उन यात्रियों के लिए होती है, जो ट्रेन के शुरू और अंत के बीच के स्टेशनों से यात्रा करते हैं. यह टिकट ट्रेन रूट के बीच छोटे स्टेशनों से वेटिंग टिकट लेने पर मिलता है. इस वेटिंग लिस्ट से कंफर्म टिकट मिलने के चांस भी काफी कम होते हैं.



