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वहीं एयरलाइन सूत्रों के अनुसार, इस प्‍लेन से दुबई जाने वाले पैसेंजर्स को शाम करीब 6:25 बजे की फ्लाइट से दुबई भेजने का इंतजाम किया गया है. यह फ्लाइट रात करीब 8:28 बजे दुबई पहुंचेगी.

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सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) में जल्‍द ही बहुत कुछ बदलने वाला है. सबकुछ ठीक रहा था तो सीआरपीएफ में दशकों पुरानी व्‍यवस्‍था न केवल फिर बहाल हो जाएगी, बल्कि सिपाहियों को प्रमोशन के लिए 20 से 22 साल तक का लंबा इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा. दरअसल, सीआरपीएफ ने सिपाहियों को तय समय सीमा में प्रमोशन देने के‍ लिए लांस नायक और नायक के रैंक दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया है.
यदि यह प्रस्‍ताव लागू होता है तो सिपाहियों को 5 साल की सेवा के बाद लांस नायक, 10 साल की नौकरी के बाद नायक और 15 साल की सर्विस पूरी होने पर हवलदार के पद पर प्रमोशन दी जाएगी. सीआरपीएफ महानिदेशालय ने इस प्रस्ताव को फोर्स की सभी यूनिटों में भेज दिया है. यूरिटों के वरिष्‍ठ अधिकारियों के साथ-साथ इस प्रस्‍ताव को लेकर लेकी सिपाहियों और हवलदार से भी सुझाव मांगे गए हैं. सभी को 48 घंटे के भीतर सुझाव भेजने के लिए कहा गया है.
अब इन प्रस्‍ताव पर सैनिक सम्मेलन, बैठकों और रोल कॉल के दौरान जवानों के साथ चर्चा की जाएगी. इस दौरान सामने आए सुझावों को बल मुख्‍यालय भेजा जाएगा. इसके बाद ही इस प्रस्‍ताव पर कोई अंतिम फैसला हो सकेगा.
1997 में खत्म कर दिए गए थे दोनों रैंक
सीआरपीएफ में पहले भी लांस नायक और नायक के रैंक हुआ करते थे. करीब तीन दशक पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद 10 अक्टूबर 1997 को इन दोनों रैंक को खत्म कर दिया गया था. इसके बाद लांस नायक और नायक के पदों को सिपाही और हवलदार के रैंक में मिला दिया गया. इस बदलाव का असर सिपाहियों की प्रमोशन पर पड़ा. मौजूदा व्यवस्था में एक सिपाही को पहली प्रमोशन यानी हेड कॉन्‍स्‍टेबल बनने के लिए करीब 20 से 22 साल तक इंतजार करना पड़ता है. लंबे समय तक एक ही रैंक पर रहने से जवानों के मनोबल पर नकारात्‍मक प्रभाव पड़ता है.
अब 10 साल में मिलेंगे दो प्रमोशन!
सीआरपीएफ के जनरल ड्यूटी (जीडी) कैडर में प्रमोशन के अवसर बढ़ाने के लिए समयबद्ध आधार पर इन रैंक को दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव है. प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 5 साल की सर्विस के बाद सिपाही से लांस नायक के तौर पर प्रमोशन मिलेगा. 10 साल की नौकरी के बाद लांस नायक को नायक के तौर पर प्रमोशन मिलेगा. वहीं, लांसनायक 15 साल की सर्विस के बाद हवलदार के पद पर प्रमोट होंगे. प्रस्ताव में लांस नायक और नायक के रैंक को शुरुआती तौर पर एड-हॉक यानी अस्थायी आधार पर शुरू करने की बात कही गई है.
फील्ड में नेतृत्व और अनुशासन होगा मजबूत
सीआरपीएफ के वरिष्‍ठ अधिकारी के अनुसार, लांस नायक और नायक जैसे रैंक छोटी टीमों को लीड करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. जंगलों में चल रहे अभियान, गश्त और संवेदनशील इलाकों में तैनाती के दौरान ऐसे जवानों की जरूरत होती है, जो अपने साथियों को लीड कर सके और मौके पर जिम्मेदारी संभाल सकें. इन रैंक के दोबारा शुरू होने से वरिष्ठ और कनिष्ठ जवानों के बीच कमान की एक अतिरिक्त कड़ी तैयार की जा सकेगी. इससे ड्यूटी का बंटवारा, जवानों के काम की निगरानी और ऑपरेशन के दौरान आपसी तालमेल बेहतर किया जा सकेगा.