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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: ट्रंप का बारूदी सुरंगें हटाने का दावा झूठ, उड़ रहे जहाजों के चीथड़े, 2 भारतीय लापता

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पिछले 9 महीनों से तनाव बढ़ा हुई है. यहां से जहाजों की आवाजाही को लेकर दावे खूब हो रहे हैं लेकिन सच ये है कि होर्मुज का रास्ता मौत की घाटी बन चुका है. यहां से जहाजों का गुजरना और अपने डेस्टिनेशन पर पहुंचना, उसकी अपनी किस्मत है. इस बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स नेवी ने दावा किया है कि 11 अक्टूबर को एक तीसरा तेल टैंकर समुद्री बारूदी सुरंग की चपेट में आ गया. बताया गया कि टक्कर के बाद जोरदार विस्फोट हुआ और जहाज में भीषण आग लग गई. IRGC के मुताबिक यह शटल टैंकर करीब 7.5 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर जा रहा था.
ईरान की ओर से कहा गया है कि टैंकर ने पहले जारी चेतावनियों को नजरअंदाज किया और उस समुद्री रास्ते से गुजरने की कोशिश की, जिसे तेहरान अनधिकृत मानता है. ईरानी सरकारी प्रसारक IRIB और प्रेस टीवी पर प्रसारित IRGC नेवी के बयान के मुताबिक जहाज ने अपना नेविगेशन और पोजिशनिंग सिस्टम बंद कर दिया था. इसके बाद जहाज उस खतरनाक रास्ते में दाखिल हुआ, जिस पर ईरान ने पाबंदी लगा रखी है. विस्फोट के बाद उठती आग की लपटें आसपास के तटीय इलाकों में भी दिखाई दीं.

2 भारतीय नाविक भी लापता

ब्रिटेन के समुद्री व्यापार संचालन केंद्र (यूकेएमटीओ) ने ओमान के सोहर एंकरेज के पास हुई एक अन्य घटना की पुष्टि की है कि एक टैंकर पर ड्रोन से हमला हुआ था. स्थानीय अधिकारी चालक दल को सुरक्षित निकालने में सहायता कर रहे हैं. इस संकट पर भारत ने भी चिंता जताई है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने होर्मुज क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों पर हमलों की निंदा की है. एमटी पेट्रो डॉल्फिन पर हमले के बाद दो भारतीय नाविकों के लापता होने की सूचना है. मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ओमान के अधिकारियों और जहाज प्रबंधन कंपनियों के संपर्क में है. भारत ने सभी पक्षों से तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है.
IRGC ने चेतावनी दी है कि उसके मुताबिक अनधिकृत समुद्री मार्गों का इस्तेमाल करने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई केवल होर्मुज जलडमरूमध्य तक सीमित नहीं रहेगी. ऐसे जहाजों को क्षेत्र के दूसरे हिस्सों में भी निशाना बनाया जा सकता है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. हालांकि इस घटना के संबंध में कई अहम सवालों के जवाब अभी नहीं दिए गए हैं. टैंकर का नाम, चालक दल की स्थिति, कैजुएलिटी और पर्यावरण के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है. अमेरिका भी पहले ईरान के कुछ ऐसे दावों पर सवाल उठा चुका है.

डोनाल्ड ट्रंप के दावे का क्या?

अमेरिका की ओर से लगातार दावा किया जा रहा था कि होर्मुज में सारी माइंस हटाई जा चुकी हैं और वहां का रास्ता साफ है. जितनी भी बार ईरान ने कहा कि होर्मुज पर उसका नियंत्रण है, ट्रंप ने इसे खारिज कर दिया और कहा कि रास्ते से टैंकर गुजर रहे हैं और अमेरिका उसकी निगरानी कर रहा है. ईरान की ओर से इस दावे को झूठ साबित करते हुए लगातार अटैक हो रहे हैं, जहाजों के चीथड़े उड़ रहे हैं.

क्या अब भी होगी दोनों पक्षों में वार्ता?

दूसरी ओर ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के दौरान कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत जारी रहेगी. उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान हमले होने के बावजूद ईरान वार्ता की टेबल नहीं छोड़ेगा. हालांकि होर्मुज क्षेत्र की घटनाएं समुद्री सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के सामने गंभीर चुनौती पेश कर रही हैं. बारूदी सुरंगों और ड्रोन हमलों से जुड़े दावों के बीच सबसे बड़ा खतरा व्यापारिक जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा को है. अगर तनाव जल्द नहीं घटा, तो तेल की आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय बाजार और क्षेत्रीय स्थिरता पर दबाव और बढ़ सकता है. ऐसे में सुरक्षित समुद्री आवाजाही बहाल करने और व्यापक संघर्ष को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास बेहद जरूरी हैं.