अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव और होर्मुज पर लगे ब्लॉकेड के कारण ईरान नए रास्तों की तलाश में है. इसी के चलते ईरान अब सेंट्रल एशिया के रास्ते चीन तक रेलवे के सहारे इस्तेमाल बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. मई 2025 से लगभग 10 हजार 400 किलोमीटर लंबा रेल कॉरिडोर चीन के शिआन शहर को ईरान की राजधानी तेहरान से जोड़ रहा है. इस रास्ते से माल लगभग 15 दिनों में पहुंच जाता है, जबकि समुद्री रास्ते से इसमें करीब एक महीना लग सकता है.
जानकारों की मानें तो रेल मार्ग की सीमा है इसकी सामान ले जाने की क्षमता. एक तेल टैंकर 6 लाख बैरल से लेकर 20 लाख बैरल से अधिक तेल एक बार में ले जा सकता है, लेकिन रेल खेप में केवल लगभग 60 हजार से 70 हजार बैरल तेल ही भेजा जा सकता है. इसलिए रेल के जरिए तेल भेजना समुद्र के रास्ते तेल भेजने के बराबरी नहीं कर सकता है.
ईरान के ज्यादातर तेल भंडार देश के दक्षिणी हिस्से में हैं, जबकि चीन की बड़ी रिफाइनरियां उसके पूर्वी तटीय इलाकों में हैं. ऐसे में तेल को रेल से मध्य एशिया के रास्ते पहुंचाना अधिक जटिल है और साथ में महंगा भी पड़ता है. इस समय ये ईरान के लिए सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है.
शिपिंग ट्रैकिंग कंपनी वोर्टेक्सा ने बताया है कि मई में ईरान का तेल निर्यात औसतन केवल लगभग 2 लाख बैरल प्रति दिन रहा है. यह अप्रैल में 1.34 मिलियन बैरल प्रति दिन था और मार्च में लगभग 1.9 मिलियन बैरल प्रति दिन था. यानी लगातार तीन महीनों में इसमें भारी गिरावट देखने को मिला है. वोर्टेक्सा की विश्लेषक क्लेयर जंगमैन का मानना है कि गिरावट के मुख्य कारण ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी है. साथ-साथ होर्मुज में मौजूदा सुरक्षा माहौल भी इसका कारण है.



