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पैरा एशियन गेम्स: गोल्ड से चूकीं शीतल देवी, सिल्वर से करना पड़ा संतोष, चौथे दिन भारत ने जिता कुल कितने मेडल?

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जापान में जारी पैरा एशियन गेम्स के चौथे दिन भी भारत का शानदार सफर जारी है. दुनिया की नंबर-1 तीरंदाज शीतल देवी ने पायल नाग के साथ महिला युगल इवेंट में सिल्वर मेडल अपने नाम किया. जन्म से ही बिना हाथों वाली शीतल तथा हाथ और पांव से दिव्यांग पायल स्वर्ण पदक के मुकाबले में चीन की जू ज़ुएक़िंग और झाओ जिंग से 141-150 से हार गईं.
भारतीय खिलाड़ी शुरू से ही चीन की खिलाड़ियों के सामने संघर्ष करती हुई दिखी. शीतल ने बेहतर खेल दिखाया और उन्होंने चार 10 अंक हासिल किए, लेकिन पायल उनकी तरह प्रदर्शन नहीं कर पाई, उन्होंने अपने अंतिम तीर पर सात अंक बनाए, इससे पहले वह केवल नौ और आठ अंक ही हासिल कर पाईं थी. शीतल ने इस स्पर्धा में लगातार दूसरा रजत पदक जीता है. पिछले एशियाई पैरा खेलों में उन्होंने सरिता देवी के साथ जोड़ी बनाकर दूसरा स्थान हासिल किया था. व्यक्तिगत स्पर्धा में भी वह स्वर्ण पदक की दावेदार हैं.
सचिन खिलारी को गोल्ड, भारत का शॉट पुट में क्लीन स्वीप
पेरिस पैरालंपिक में सिल्वर मेडल जीतने वाले सचिन सरजेराव खिलारी ने पुरुषों के शॉट पुट एफ46 स्पर्धा में नए रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि भारतीय खिलाड़ियों ने इस स्पर्धा में क्लीन स्वीप किया. सचिन ने इस तरह से पिछले एशियाई पैरा खेलों में जीते गए अपने स्वर्ण पदक का अच्छी तरह से बचाव किया, उन्होंने अपने छठे और अंतिम थ्रो में 15.87 मीटर फेंककर पहला स्थान हासिल किया और 15.67 मीटर के खेलों के पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया. भारत के ही मोहम्मद यासर ने तीसरे प्रयास में 15.06 मीटर का थ्रो करके रजत पदक जीता, जबकि परवीन 14.94 मीटर के साथ तीसरे स्थान पर रहे. एफ46 श्रेणी उन एथलीटों के लिए है जिनका कोहनी के ऊपर या नीचे एक हाथ कटा होता है, या वे ऊपरी अंग से दिव्यांग होते हैं. वे खड़े होकर प्रतिस्पर्धा करते हैं और अपने कूल्हों और पैरों का उपयोग करके गोला फेंकने के लिए शक्ति लगाते हैं.
प्रवीण कुमार को हाई जम्प में गोल्ड
पुरुषों की ऊंची कूद टी44/64 स्पर्धा में भारत के प्रवीण कुमार ने नए रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि बंटी ने इसी स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया. प्रवीण ने 2.05 मीटर की कूद लगाकर स्वर्ण पदक, जबकि बंटी ने 1.92 मीटर की कूद के साथ रजत पदक हासिल किया. उज्बेकिस्तान के तेमुरबेक गियाज़ोव 1.86 मीटर के साथ तीसरे स्थान पर रहे. टी64 और टी44 वर्ग के एथलीट अक्सर संयुक्त स्पर्धा में एक साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं क्योंकि विश्व पैरा एथलेटिक्स पर्याप्त प्रतियोगियों और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए निचले अंगों के वर्गों को एक समूह में रखता है. टी64 उन एथलीटों के लिए है जो कृत्रिम निचले अंगों का उपयोग करते हैं, जबकि टी44 उन एथलीटों के लिए है जो निचले अंगों से दिव्यांग होते हैं लेकिन वह कृत्रिम अंगों का उपयोग नहीं करते हैं.