ट्रेन में सफर के दौरान अगर आपकी भी मोबाइल पर तेज आवाज में रील, वीडियो या गाने चलाते हैं तो संभल जाइए. अब आपके खिलाफ बगल वाले पैसेंजर्स शिकायत कर सकते हैं और फिर आप पर एक्शन भी हो सकता है. दक्षिण रेलवे ने ऐसे यात्रियों के खिलाफ सख्ती करने के निर्देश जारी किए हैं. रेलवे का कहना है कि सार्वजनिक जगहों पर मोबाइल के स्पीकर से तेज आवाज में कंटेंट चलाना दूसरे यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बनता है. इस तरह की हरकतों पर रोक लगाने के लिए यात्रियों को नियमों के प्रति जागरूक किया जाएगा और उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई भी हो सकती है.
दक्षिण रेलवे ने अपने सभी डिवीजनों को भेजे गए सर्कुलर में रेलवे स्टेशनों और ट्रेन के डिब्बों में मोबाइल पर तेज आवाज में संगीत या वीडियो चलाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई है. रेलवे के मुताबिक, मोबाइल इंटरनेट की आसान उपलब्धता के कारण सार्वजनिक जगहों पर स्पीकर मोड में वीडियो और अन्य कंटेंट चलाना आम होता जा रहा है. इससे सहयात्रियों को असुविधा होती है और सफर का माहौल खराब होता है.
1000 रुपये का जुर्माना, ट्रेन से भी उतार दिया जाएगा नीचे
दक्षिण रेलवे ने संबंधित कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए अधिकारियों को ऐसे मामलों में कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. इस ताजा सर्कुलर के मुताबिक, दोषी यात्री पर 1000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर उसे ट्रेन के कोच से हटाया भी जा सकता है. वहीं अगर किसी ने इस बाबत हंगामा किया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है.
रेलवे ने किस कानून का दिया हवाला?
सार्वजनिक जगहों पर दूसरों को परेशान करने से जुड़ा प्रावधान भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 270 में भी है, जो सार्वजनिक उपद्रव की परिभाषा से संबंधित है. हालांकि, किसी विशेष घटना में कौन-सा कानून लागू होगा, यह उसके तथ्यों और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगा.
रेलवे की इस पहल का मकसद सफर के दौरान यात्रियों को शोर-शराबे से राहत दिलाना और सभी के लिए यात्रा को ज्यादा आरामदायक बनाना है. अब ट्रेन में मोबाइल पर वीडियो या गाने सुनते समय ईयरफोन का इस्तेमाल करना ही बेहतर विकल्प हो सकता है.



