देश में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की बेरोजगारी दर सितंबर, 2026 में 5 फीसदी पर स्थिर रही है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) में बताया गया है कि इस साल अगस्त की तुलना में सितंबर में बेरोजगारी दर में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि सितंबर, 2025 में बेरोजगारी दर 5.2 फीसदी थी. इन आंकड़ों में साफ दिख रहा है कि शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर ग्रामीण इलाकों से ज्यादा है.
एनएसओ के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर सितंबर में मामूली रूप से बढ़कर 4.2 फीसदी हो गई, जो अगस्त में 4.1 फीसदी थी. इसके अलावा शहरी क्षेत्रों में यह 6.8 फीसदी से बढ़कर 6.9 फीसदी पहुंच गई. ग्रामीण बेरोजगारी दर सितंबर, 2025 में 4.6 फीसदी और शहरी बेरोजगारी दर 6.8 फीसदी थी. सितंबर, 2026 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों में बेरोजगारी दर 4.9 फीसदी पर स्थिर रही, जबकि जून, 2026 के बाद से इसमें गिरावट या स्थिरता का रुख बना हुआ है.
महिलाओं की बेरोजगारी दर कितनी
एनएसओ ने बताया कि महिलाओं में बेरोजगारी दर सितंबर में मामूली बढ़कर 5.2 फीसदी रही है, जो अगस्त में 5.1 फीसदी थी. ग्रामीण महिलाओं में यह दर 3.9 फीसदी रही, जो साल 2026 में अब तक का सबसे निचला स्तर है. वहीं, शहरी महिलाओं में बेरोजगारी दर 8.9 फीसदी से बढ़कर 9.2 फीसदी हो गई. यह आंकड़ा साफ दिखता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में बेरोजगारी दर अधिक तेजी से बढ़ रही है.
एनएसओ ने बताया कि महिलाओं में बेरोजगारी दर सितंबर में मामूली बढ़कर 5.2 फीसदी रही है, जो अगस्त में 5.1 फीसदी थी. ग्रामीण महिलाओं में यह दर 3.9 फीसदी रही, जो साल 2026 में अब तक का सबसे निचला स्तर है. वहीं, शहरी महिलाओं में बेरोजगारी दर 8.9 फीसदी से बढ़कर 9.2 फीसदी हो गई. यह आंकड़ा साफ दिखता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में बेरोजगारी दर अधिक तेजी से बढ़ रही है.
पुरुष-महिला दोनों की बेरोजगारी दर घटी
सर्वेक्षण में बताया गया है कि पिछले साल की समान अवधि की तुलना में पुरुषों और महिलाओं दोनों में बेरोजगारी दर घटी है. ग्रामीण महिलाओं में यह दर साल 2026 के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है. एनएसओ का पीएलएफएस श्रम बल की भागीदारी और रोजगार व बेरोजगारी की स्थिति से जुड़े आंकड़ों का प्रमुख स्रोत है. यह मासिक सर्वेक्षण देशभर में 3,70,513 लोगों से जुटाई गई जानकारी पर आधारित है. कुल श्रमिक-जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) सितंबर, 2026 में सालाना आधार पर 0.3 फीसदी बढ़कर 52.7 फीसदी हो गया है.
सर्वेक्षण में बताया गया है कि पिछले साल की समान अवधि की तुलना में पुरुषों और महिलाओं दोनों में बेरोजगारी दर घटी है. ग्रामीण महिलाओं में यह दर साल 2026 के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है. एनएसओ का पीएलएफएस श्रम बल की भागीदारी और रोजगार व बेरोजगारी की स्थिति से जुड़े आंकड़ों का प्रमुख स्रोत है. यह मासिक सर्वेक्षण देशभर में 3,70,513 लोगों से जुटाई गई जानकारी पर आधारित है. कुल श्रमिक-जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) सितंबर, 2026 में सालाना आधार पर 0.3 फीसदी बढ़कर 52.7 फीसदी हो गया है.
किसकी कितनी है लेबर फोर्स में हिस्सेदारी
एनएसओ के आंकड़े दिखाते हैं कि सितंबर, 2026 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की श्रम बल में भागीदारी दर (एलएफपीआर) 55.5 फीसदी और यह सितंबर, 2025 की तुलना में 0.2 फीसदी अधिक है. शहरी क्षेत्रों में श्रम बल भागीदारी दर अगस्त, 2026 के 50.4 फीसदी से बढ़कर सितंबर में 50.7 फीसदी हो गई. सितंबर, 2026 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं की कुल श्रम बल भागीदारी दर सालाना आधार पर 0.5 फीसदी बढ़कर 34.6 फीसदी हो गई. इसी अवधि में ग्रामीण महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर एक फीसदी बढ़कर 38.9 फीसदी रही है.
एनएसओ के आंकड़े दिखाते हैं कि सितंबर, 2026 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की श्रम बल में भागीदारी दर (एलएफपीआर) 55.5 फीसदी और यह सितंबर, 2025 की तुलना में 0.2 फीसदी अधिक है. शहरी क्षेत्रों में श्रम बल भागीदारी दर अगस्त, 2026 के 50.4 फीसदी से बढ़कर सितंबर में 50.7 फीसदी हो गई. सितंबर, 2026 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं की कुल श्रम बल भागीदारी दर सालाना आधार पर 0.5 फीसदी बढ़कर 34.6 फीसदी हो गई. इसी अवधि में ग्रामीण महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर एक फीसदी बढ़कर 38.9 फीसदी रही है.



