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सरकारी योजनाओं के नाम पर प्राइवेट अस्पतालों में क्या चल रहा है? IT की टीम खंगाल रही बिल

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सरकारी अस्पतालों में जगह नहीं मिलने या बेहतर इलाज की उम्मीद में लोग निजी अस्पतालों का रुख करते हैं. राजस्थान में सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत भी मरीज निजी अस्पतालों में इलाज करा सकते हैं. इन योजनाओं का मकसद यही है कि इलाज के खर्च के कारण किसी मरीज को परेशानी न उठानी पड़े. लेकिन जब इन्हीं योजनाओं के बिल, दवाइयों की खरीद और अस्पतालों के खातों की जांच के लिए आयकर विभाग की टीम पहुंचती है, तो कई सवाल खड़े होते हैं.
झुंझुनूं शहर के चूरू रोड स्थित आर एंड आर मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल में आयकर विभाग की जांच लगातार तीसरे दिन भी जारी रही. सोमवार, 12 अक्टूबर की सुबह करीब पांच बजे पांच गाड़ियों में पहुंची 15 से ज्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम ने अस्पताल में जांच शुरू की थी. बुधवार को भी टीम अस्पताल के दस्तावेज, बिलिंग रिकॉर्ड और कंप्यूटरों में मौजूद जानकारी खंगाल रही थी. सूत्रों के मुताबिक, जांच शुक्रवार तक चलने की संभावना है.
सरकारी योजनाओं के बिलों पर खास नजर
जांच में सबसे अहम पहलू सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत अस्पताल की ओर से किए गए बिलों और दावों का है. टीम एक-एक बिल की जांच कर रही है. दवाइयां कहां से खरीदी गईं, उनका बिल कितना बना, अस्पताल के रिकॉर्ड में क्या दर्ज है और कंप्यूटर में मौजूद डिजिटल जानकारी से उसका मिलान होता है या नहीं, इन सब बातों को देखा जा रहा है. अस्पताल से जुड़े चार लोगों से पूछताछ किए जाने की जानकारी भी सामने आई है. जांच टीम में दो साइबर एक्सपर्ट शामिल बताए जा रहे हैं. ये मोबाइल फोन और कंप्यूटर में मौजूद रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं. यानी पड़ताल सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल रिकॉर्ड को भी खंगाला जा रहा है.
जांच में जिन योजनाओं से जुड़े रिकॉर्ड देखे जाने की जानकारी सामने आई है, उनमें चिरंजीवी योजना, आरजीएचएस, आयुष्मान भारत और ईसीएचएस शामिल हैं. इन योजनाओं का लाभ अलग-अलग वर्गों के लोगों को मिलता है.
  • चिरंजीवी योजना: राजस्थान में पूर्व में मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना के नाम से जानी जाने वाली व्यवस्था के तहत पात्र परिवारों को इलाज का लाभ देने की योजना बनाई गई थी. राज्य में बाद में मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (MAA) के नाम से स्वास्थ्य सुरक्षा की व्यवस्था आगे बढ़ाई गई. जांच में पुरानी चिरंजीवी योजना या उससे जुड़े रिकॉर्ड का उल्लेख होने पर संबंधित बिलों की पड़ताल अहम हो जाती है.
  • आरजीएचएस: राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम राज्य के पात्र सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स और नियमों के तहत शामिल उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराती है. इस योजना के तहत इलाज और दवाइयों से जुड़े बिलों का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होता है.
  • आयुष्मान भारत: यह केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना है, जिसके तहत पात्र लाभार्थियों को तय नियमों के अनुसार अस्पताल में इलाज की सुविधा मिलती है. इसमें अस्पताल के दावों और इलाज से जुड़े रिकॉर्ड का सही होना जरूरी है.
  • ईसीएचएस: एक्स-सर्विसमेन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम पूर्व सैनिकों और पात्र आश्रितों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए है. इसके तहत अस्पताल में हुए इलाज और दवाइयों से जुड़े दावों की जांच भी महत्वपूर्ण है.
इन योजनाओं में मरीजों के इलाज से जुड़े बिलों के आधार पर भुगतान या खर्च का हिसाब रखा जाता है. इसलिए बिल, इलाज के रिकॉर्ड और दवाइयों की खरीद का मिलान जरूरी है. यदि कहीं अंतर मिलता है, तो उसकी वजह की जांच की जा सकती है.
तीन राज्यों में अस्पतालों पर कार्रवाई, 20 करोड़ की आशंका
यह कार्रवाई सिर्फ झुंझुनूं तक सीमित नहीं है. 12 अक्टूबर को राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में अस्पतालों तथा उनसे जुड़े कुछ ठिकानों पर आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई की खबर सामने आई थी. राजस्थान में जयपुर के अमर मेडिकल एंड रिसर्च सेंटर, झुंझुनूं के आर एंड आर मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल और बहरोड़ के पार्क कैलाश अस्पताल में आयकर विभाग की टीमों ने जांच की. सूत्रों के हवाले से करीब 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की संभावित टैक्स चोरी की आशंका भी जताई गई है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि अस्पतालों से जुड़े वित्तीय लेन-देन में इस्तेमाल हुई रकम का स्रोत क्या है और खातों में दर्ज आंकड़ों का वास्तविक लेन-देन से कितना मेल है.
मरीजों के भरोसे से जुड़ा है पूरा मामला
सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में निजी अस्पतालों की भूमिका इसलिए अहम है, क्योंकि मरीज इलाज के लिए इन व्यवस्थाओं पर भरोसा करते हैं. अस्पताल जो इलाज करता है, जो दवाइयां देता है और उसके बदले जो बिल पेश करता है, उसका रिकॉर्ड सही होना जरूरी है. बिलों में कोई गड़बड़ी मिलती है तो उसका असर सिर्फ सरकारी खातों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि योजनाओं की पारदर्शिता और मरीजों के भरोसे पर भी सवाल उठते हैं. झुंझुनूं के आर एंड आर अस्पताल में जांच के दौरान यही रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं. अभी तक सामने आई जानकारी के आधार पर कहा जा सकता है कि आयकर विभाग वित्तीय रिकॉर्ड, दवाइयों की बिलिंग और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के दावों का मिलान कर रहा है. जांचों ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि नागरिकों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने के बजाय प्राइवेट अस्पताल के लोग इसका दुरुपयोग करने लगे तो सारी योजनाओं का लक्ष्या धरा का धरा रह जाएगा.