हाल के दिनों में कई गैस उपभोक्ताओं को कंपनियों की ओर से एसएमएस प्राप्त हुए हैं, जिनमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आयकर विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार उनकी या उनके परिवार के सदस्यों की सालाना आय एलपीजी सब्सिडी पाने के लिए निर्धारित सीमा से अधिक है और वे अब सब्सिडी के पात्र नहीं रह गए हैं. मैसेज में लिखा है कि यदि किसी उपभोक्ता को लगता है कि यह संदेश उसे गलती से मिला है और सब्सिडी का हकदार है तो वह 7 दिनों के भीतर अपना पक्ष रख सकता है.
एलपीजी सब्सिडी योजना का प्राथमिक लक्ष्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की सहायता करना और उन्हें स्वच्छ ईंधन के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करना है. सब्सिडी पाने के इच्छुक उपभोक्ताओं को बाजार मूल्य पर सिलेंडर खरीदना पड़ता है और बाद में सरकार निर्धारित सब्सिडी राशि सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर (DBT) कर देती है. यह सब्सिडी पाने को आधार नंबर को एलपीजी कनेक्शन और बैंक खाते से लिंक करना अनिवार्य है.
दिसंबर 2015 से लागू एलपीजी सब्सिडी नियमों के अनुसार, यह सब्सिडी वो ही परिवार ले सकता है, जिसकी सालाना आय दस लाख रुपये से कम है. 10 लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले परिवारों को सब्सिडी के दायरे से बाहर रखा गया था.इस आय सीमा की गणना में पति और पत्नी दोनों की संयुक्त आय को जोड़ा जाता है. तेल कंपनियों ने आयकर विभाग के डेटाबेस से अब परिवारों की आय की जानकारी लेना शुरू कर दिया है.



