सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे की जांच में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों में बिल्डिंग मालिक बताए जा रहे हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता और बेटा महेश गुप्ता शामिल हैं. जांच में बिल्डिंग के मालिकाना हक और पीजी के संचालन को लेकर भी कई अहम जानकारियां सामने आई हैं.
पुलिस के मुताबिक, हादसे की शुरुआती जांच में हरिराम गुप्ता को बिल्डिंग का मालिक माना गया था. हादसे के बाद हरिराम और उनका परिवार गुरुग्राम स्थित अपने घर से फरार हो गया था. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए हरिराम गुप्ता को हरियाणा के भिवाड़ी से गिरफ्तार किया. इसके बाद जांच में सामने आया कि हरिराम और उनका बेटा महेश इस बिल्डिंग में चल रहे पीजी का संचालन और पूरा ऑपरेशन देखते थे.
जांच में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया कि बिल्डिंग का बिजली कनेक्शन हरिराम गुप्ता और उनके बेटे महेश गुप्ता के नाम पर था. हालांकि, प्रॉपर्टी के दस्तावेजों में बिल्डिंग की मालिक उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता हैं. इसी वजह से पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बिल्डिंग के वास्तविक संचालन, मालिकाना हक और पीजी के प्रबंधन में परिवार के प्रत्येक सदस्य की क्या भूमिका थी.
बेसमेंट में पानी भरने के बाद चल रहा था रेनोवेशन
जांच के दौरान यह जानकारी भी सामने आई है कि पिछले साल बिल्डिंग के बेसमेंट में पानी भर गया था. इसके बाद बेसमेंट में रेनोवेशन का काम कराया जा रहा था. इसी दौरान यह हादसा हुआ. पुलिस अब यह जांच कर रही है कि बेसमेंट में किस तरह का निर्माण या मरम्मत कार्य कराया जा रहा था और क्या उस दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था.
रेंट एग्रीमेंट भी जांच के दायरे में
हादसे के बाद एक रेंट एग्रीमेंट की कॉपी भी सामने आई है, जिसमें कथित तौर पर ऐसी शर्त लिखी है कि किसी हादसे की स्थिति में मालिक की जिम्मेदारी नहीं होगी. पुलिस अब इस दस्तावेज की भी जांच कर रही है.
जांच अधिकारियों के मुताबिक, इस एग्रीमेंट को लेकर गिरफ्तार आरोपी महेश गुप्ता से पूछताछ की जाएगी. पुलिस यह जानना चाहती है कि एग्रीमेंट में इस तरह की शर्त किसने और क्यों शामिल कराई थी. साथ ही दस्तावेज की वास्तविकता और उसमें दर्ज अन्य शर्तों की भी जांच की जा रही है.
क्या सत्य निकेतन में सिर्फ एक ही पीजी था?
पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि हरिराम और महेश सिर्फ इसी एक बिल्डिंग में पीजी चला रहे थे या इलाके में उनकी और भी संपत्तियां अथवा पीजी थे. इस सवाल पर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में एक ही बिल्डिंग और एक ही पीजी के संचालन की जानकारी मिली है. हालांकि, परिवार की अन्य संपत्तियों और संभावित पीजी संचालन को लेकर जांच अभी जारी है.
फिलहाल पुलिस की जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि हादसे के समय बिल्डिंग में क्या काम चल रहा था, पीजी के संचालन की जिम्मेदारी किसकी थी, बेसमेंट में रेनोवेशन किसकी अनुमति से कराया जा रहा था और सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं.
तीनों गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के जरिए पुलिस हादसे की पूरी कड़ी जोड़ने की कोशिश कर रही है. साथ ही रेंट एग्रीमेंट, बिजली कनेक्शन और प्रॉपर्टी के दस्तावेजों के आधार पर यह भी तय किया जा रहा है कि हादसे के लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर बनती है.



