मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर सिर्फ एनर्जी सेक्टर तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसका एक ऐसा पहलू भी सामने आया है जिस पर आम जनता का ध्यान अक्सर नहीं जाता. हम बात कर रहे हैं भारतीय रुपये की, जो ग्लोबल टेंशन के बीच लगातार कमजोर होता दिख रहा है. आज मंगलवार को भारतीय रुपया 95.33 प्रति डॉलर पर खुला, जो पिछले बंद 95.08 के मुकाबले लगभग रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया. भारतीय रुपया में गिरावट की बड़ी वजह ग्लोबल ऑयल की कीमतों में तेजी और डॉलर की लगातार मांग को माना जा रहा है.
भारतीय रुपये की कमजोरी कई तरह से असर डालती है, जिनका सीधा प्रभाव आम लोगों की जेब और पूरी अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलता है. जब रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है, तो भारत को कई चीजें इंपोर्ट करने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ते हैं. जैसे कच्चा तेल, दवाइयां और इलेक्ट्रॉनिक्स आदि. इससे देश का इंपोर्ट बिल बढ़ जाता है और विदेशी भुगतान महंगा हो जाता है.
पेट्रोल-डीजल हो सकता है महंगा
भारतीय रुपया कमजोर होने से महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है. पेट्रोल-डीजल, गैस, खाने-पीने की चीजें और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी जरूरी चीजें महंगी हो सकती हैं. इसका कारण यह है कि भारत अपनी कई जरूरी सामान विदेश से आयात करता है. जब डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है, तो इन्हें खरीदने की लागत बढ़ जाती है.



