सोने का भाव गिरे जा रहा है. पहले तो कह रहे थे सोना 2 लाख को पार कर जाएगा. जनवरी में 1.75 लाख को पार कर गया था. अब 1.5 लाख के भी नीचे चल रहा है. शादियों का सीज़न भी आ गया और धनतेरस भी. तो दाम 1.5 लाख के नीचे बने रहने पर ख़ुश होना है या ये चिंता की बात है कि 1.75 लाख से ऊपर चल रहा था और अब 1.5 के नीचे चल रहा है तो और ना गिर जाए? क्योंकि गिरावट तो कई महीनों से चल रही है. तो पहले तो ये समझने की ज़रूरत है कि दाम इतने महीनों से गिरे क्यों जा रहे हैं सोने के? जनवरी में सोना अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था, 1.75 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से भी ऊपर. और अक्टूबर का अंत आते आते ये घटकर करीब 1.43 लाख के आसपास आ गया. यानी लगभग 20% की गिरावट हो चुकी है. और रोज़ाना थोड़ी-बहुत गिरावट या उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है. इसकी जो सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है वो ये कि अमेरिका के बॉन्ड की यील्ड ऊपर बनी हुई है.
ये क्या होता है? अमेरिका का बॉन्ड क्या होता है और बॉन्ड की यील्ड क्या होती है? बॉन्ड का मतलब उधार की रसीद. आप किसी को उधार दो तो वो आपको रसीद देता है कि इतने पैसे लिए हैं और इस पर इतना ब्याज देना तय हुआ है. जब कोई सरकार बॉन्ड देती है मतलब सरकार आपसे पैसे उधार ले रही है. जब अमेरिका की सरकार ये पैसे उधार लेती है और बदले में बॉन्ड देती है तो ये कहलाते हैं अमेरिका की सरकार के बॉन्ड. बॉन्ड पर लिखा होता है कि कुछ साल बाद पूरा पैसा लौटाने का वादा है और बीच में फ़लां दर पर ब्याज दिया जाएगा सरकार की तरफ़ से. यील्ड का मतलब होता है कि उस बॉन्ड पर सालाना कितना ब्याज या रिटर्न मिल रहा है. मिसाल के तौर पर अगर दस साल का अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5% है तो इसका मतलब है कि अगर आप सरकार को दस साल के लिए एक लाख डॉलर उधार देते हो तो आपको हर साल पांच हजार डॉलर ब्याज मिलेगा और दस साल बाद मूल रकम भी वापस मिल जाएगी.
सोना सस्ता होने की असल वजह समझिए
ये यील्ड बाज़ार में रोज़ बदलती रहती है. क्योंकि ये बॉन्ड ख़रीदे बेचे जाते हैं. अमेरिका की सरकार की गारंटी है तो इसको तो बहुत ही सुरक्षित निवेश माना जाता है. इसलिए दुनिया भर के जो बड़े निवेशक होते हैं, मतलब जैसे देशों के रिज़र्व बैंक या बड़ी-बड़ी निवेश कंपनिया और बैंक जो होते हैं वो ये बॉन्ड ख़रीदकर अपना पैसा उनमें लगाते हैं. पहले अमेरिका के बॉन्ड 2-3% ब्याज दे रहे थे. अब क्या हुआ है कि ट्रंप ने ईरान पर जो युद्ध छेड़ दिया तो दुनिया भर में कच्चा तेल ही महंगा हो गया. कच्चा तेल महंगा हो गया तो अमेरिका में भी हर तरह की महंगाई सर उठाने लगी. और वहां के रिज़र्व बैंक को भी ब्याज दरें बढ़ानी पड़ गईं. इससे बॉन्ड पर यील्ड भी बढ़ गई. और अब अमेरिका के बॉन्ड पर यील्ड 5% से भी ज़्यादा चल रही है. यानी मोटे तौर पर बात ये है कि अमेरिका की सरकार को ही पैसा उधार देने पर 5% की साल की कमाई की जा सकती है. और अमेरिका की सरकार की गारंटी है उस पर.
अमेरिका में ये बॉन्ड की यील्ड क्या है
अमेरिका के दस साल के बॉन्ड की यील्ड दुनिया भर में बहुत महत्वपूर्ण दर मानी जाती है क्योंकि यही दर बताती है कि लंबे समय के लिए पैसे उधार लेने का ख़र्च अभी कितना चल रहा है. पूरी दुनिया पर इसका असर पड़ता है. जब ये यील्ड ऊंची होती है तो बैंकों के लिए, कंपनियों के लिए और आम लोगों के लिए भी क़र्ज़ महंगा हो जाता है. अभी ये दस साल की यील्ड 5% के आसपास या उससे थोड़ा ऊपर-नीचे चल रही है. इतना ऊंचा स्तर इसका कई साल में नहीं रहा है. तो बड़े-बड़े बैंक और बड़ी-बड़ी निवेश कंपनियां अपना पैसा बाक़ी निवेश से निकाल कर ये बॉन्ड लेने के लिए दौड़ रही हैं. इसीलिए भारत का शेयर बाज़ार भी गिरा हुआ है क्योंकि यहां से पैसा निकालकर विदेशी निवेशक अमेरिका के बॉन्ड में पैसा डाल रहे हैं. क्योंकि उसमें तो ब्याज मिलने की गारंटी है और वो ब्याज भी मिलेगा अमेरिकी डॉलरों में. और गारंटी है अमेरिका की सरकार की. सुरक्षित निवेश दुनिया के बड़े निवेशकों और बैंकों के लिए बहुत ज़रूरी होता है. इसके लिए वो सोना भी ख़रीदते हैं.
सस्ते सोने का अमेरिका कनेक्शन क्या
लेकिन सोना ऐसा निवेश होता है जो होता तो बहुत सुरक्षित है लेकिन उसपर कोई ब्याज नहीं मिलता. जब अमेरिका की सरकार के बॉन्ड पर 5% ब्याज मिल रहा हो तो निवेशकों को लगता है कि सोना रखने से अच्छा है बॉन्ड खरीद लो, जिससे बिना कुछ किए ब्याज भी आता रहे और अमेरिका की सरकार का बॉन्ड है तो वो भी सोने की तरह ही सुरक्षित है. ऊपर से ब्याज भी मिलेगा डॉलरों में. मतलब अगर एक लाख रुपये हैं. अगर आप सोना खरीदते हैं तो वो सोना वैसे ही पड़ा रहता है, न तो उसमें कुछ बढ़ता है और न ही रोज़ कोई आमदनी होती. लेकिन अगर उसी रुपये के पहले तो डॉलर ख़रीद लें और उन्हीं डॉलरों को अमेरिका के बॉन्ड में लगा दें जिस पर 5% ब्याज मिल रहा हो तो साल में अतिरिक्त कमाई भी हो जाएगी. इसलिए जब ब्याज ऊंचा होता है तो लोग सोना बेचकर या नया सोना न खरीदकर बॉन्ड की तरफ भागते हैं. यही हो रहा है पिछले कुछ महीनों से और इससे सोने की मांग घट रही अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में और उसकी वजह से सोने क़ीमत कम होती जा रही है.



