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2100 KM, समुद्र के नीचे… भारत-सऊदी मिलकर क्या बिछा रहे, ज‍िससे टुकुर टुकर देख रही दुन‍िया

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सऊदी अरब से भारत का र‍िश्ता बेहद खास है. हम उनसे तेल लेते हैं, कभी कभी गैस भी लेते हैं. लेकिन अब दोनों देश अरब सागर की गहराई में करीब 2100 किलोमीटर लंबी एक ऐसी लाइन बिछाने जा रहे हैं, ज‍िस पर पूरी दुन‍िया की नजर है. भारत और सऊदी अरब के बीच प्रस्तावित अंडरसी पावर लिंक दोनों देशों को सीधे बिजली के ग्रिड से जोड़ सकता है. इसकी क्षमता करीब 3 गीगावाट और अनुमानित लागत करीब 9 अरब डॉलर बताई गई है. 5 अक्‍तूबर 2026 को इस प्रोजेक्‍ट पर दोनों देश बड़ा फैसला लेने वाले हैं.
भारत और सऊदी अरब के रिश्ते लंबे समय से तेल और एनर्जी के इर्द-गिर्द घूमते रहे हैं. लेकिन अब दोनों देश ऐसा स‍िस्‍टम बनाने जा रहे हैं, ज‍िससे एक दूसरे को ब‍िजली का बंटवारा क‍िया जा सके. मतलब, भारत स‍िर्फ गल्‍फ कंट्रीज से तेल-गैस खरीदने के बारे में नहीं सोच रहा, बल्‍क‍ि खुद बिजली पैदा करके उन्‍हें बेचने के बारे में भी सोच रहा है. इस वजह से इस प्रोजेक्‍ट का महत्‍व सामान्‍य ट्रांसम‍िशन है.
समुद्र के नीचे जाएगा 2100 KM का इलेक्‍ट्र‍िस‍िटी कॉर‍िडोर
फिलहाल जिस मॉडल पर काम हुआ है, उसमें करीब 2100 किलोमीटर लंबा अंडरसी कनेक्शन और 3 गीगावाट की हाई-वोल्टेज डायरेक्ट करंट यानी HVDC क्षमता शामिल है. इसकी लागत करीब 9 अरब डॉलर आंकी गई है. शुरुआती अनुमान करीब 5 अरब डॉलर का था, लेकिन लागत लगातार बढ़ती जा रही है. 5 अक्टूबर 2026 को होने जा रही मीटिंग में इस पर फैसला होगा.
किसकी बिजली कहां जाएगी?
अगर दोनों देशों के ग्रिड जुड़ते हैं तो अलग-अलग समय पर बिजली की मांग और उत्पादन में मौजूद अंतर का फायदा उठाया जा सकता है. जहां किसी समय अतिरिक्त बिजली होगी, वहां से दूसरी तरफ बिजली भेजी जा सकती है. इससे र‍िन्‍यूवल एनर्जी को ग्रिड में इस्तेमाल करने का रास्ता खुल सकता है. भारत के लिए यह अपने बड़े सोलर और विंड पावर बेस को इंटरनेशनल इलेक्‍ट्र‍िस‍िटी मार्केट से जोड़ने का एक रास्‍ता होगा.
भारत का असली मास्टरप्लान
यह प्रोजेक्ट अकेला नहीं है. इसके पीछे भारत की वन सन, वन वर्ल्‍ड, वन ग्र‍िड यानी OSOWOG की सोच है. इसका लक्ष्य अलग-अलग देशों के बिजली ग्रिड को जोड़कर र‍िन्‍यूवल एनर्जी का सीमा पार कारोबार आसान करना है. सरकारी दस्तावेजों में सऊदी अरब के साथ-साथ UAE, सिंगापुर और मालदीव जैसे देशों के साथ ग्रिड इंटरकनेक्शन पर चर्चा का उल्लेख है. यानी आज जो लाइन भारत-सऊदी के बीच दिखाई दे रही है, वह भविष्य में बड़े क्षेत्रीय पावर नेटवर्क की एक कड़ी बन सकती है.