Home छत्तीसगढ़ अबूझमाड़ की ‘लाल माटी’ पर खिंची विकास की नई रेखा

अबूझमाड़ की ‘लाल माटी’ पर खिंची विकास की नई रेखा

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छत्तीसगढ़ के घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों से घिरे अबूझमाड़ क्षेत्र में सुरक्षा शिविरों के विस्तार, सड़कों के निर्माण और प्रशासनिक पहलों के जरिए लाल आतंक की छाया पीछे छूट रही है और बुनियादी विकास की एक नई रेखा खिंच रही है। वर्षों तक दुर्गम पहाड़ियों, सघन वनों और भौगोलिक बाधाओं के कारण विकास की मुख्यधारा से कटा ‘अबूझमाड़’ अब अपनी पुरानी पहचान पीछे छोड़ रहा है। कभी जहां सड़कों का नामो-निशां नहीं था, वहां आज विकास की एक नई इबारत लिखी जा रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-130डी का नारायणपुर से कुतुल तक निर्माण इस क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक कायाकल्प की सबसे बड़ी मिसाल बनकर उभरा है। यह सड़क केवल कंक्रीट का मार्ग नहीं, बल्कि अबुझमाड़ के आदिवासियों की जीवनरेखा और स्वर्णिम भविष्य का द्वार बन गई है।

​जब कट जाता था शेष दुनिया से नाता

​ एक दौर था जब मानसून की पहली बारिश के साथ ही अबूझमाड़ के दर्जनों गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट जाता था। स्वास्थ्य, शिक्षा और दैनिक जरूरतों के लिए ग्रामीणों को कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। गंभीर मरीजों को खाट पर लादकर अस्पताल पहुंचाना मजबूरी थी, जहां घंटों की देरी जानलेवा साबित होती थी। बच्चों का स्कूल जाना और किसानों का अपनी उपज बाजार तक ले जाना एक कठिन संघर्ष था।

एनएच-130डी: सुगम आवागमन और विकास का सेतु

​राष्ट्रीय राजमार्ग-130डी के आकार लेने के साथ ही परिदृश्य तेजी से बदला है। मार्ग पर निर्मित आधुनिक पुलों और पक्की संरचनाओं ने बारहमासी आवागमन को संभव बना दिया है। इसके चलते अब दूरस्थ अंचलों तक प्रशासनिक पहुंच, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के पहुंच रहा है।

​बदला जन-जीवन, बढ़े रोज़गार के अवसर

​सड़क बनने से अबूझमाड़ के जन-जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है। अब गंभीर मरीजों को समय पर एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। दुर्गम रास्तों के डर से दूर रहने वाले बच्चे अब आसानी से स्कूल और कॉलेज पहुंच रहे हैं। इसी तरह किसानों और स्थानीय कारीगरों को अपनी उपज और हस्तशिल्प को बड़े बाजारों तक ले जाने की सुविधा मिली है, जिससे स्थानीय व्यापार को संबल मिला है।

नई संभावनाओं का खुलता द्वार

​एनएच-130डी सिर्फ नारायणपुर और कुतुल को नहीं जोड़ता, बल्कि यह अबूझमाड़ को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ता है। आने वाले समय में यह मार्ग क्षेत्र में इको-टूरिज्म, नए निवेश, व्यापार और समग्र सामाजिक परिवर्तन की मजबूत आधारशिला साबित होगा। अबूझमाड़, जो कभी अपनी दुर्गमता के लिए जाना जाता था, आज विकास और समृद्धि की एक नई पहचान के साथ देश के मानचित्र पर मजबूती से उभर रहा है।

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