Home छत्तीसगढ़ सारंगढ़-बिलाईगढ़ को कुपोषण मुक्त बनाने की बड़ी मुहिम

सारंगढ़-बिलाईगढ़ को कुपोषण मुक्त बनाने की बड़ी मुहिम

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मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से संचालित एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य गंभीर रूप से कुपोषित और संकटग्रस्त बच्चों (विशेषकर 0 से 6 वर्ष तक के) को कुपोषण के चक्र से बाहर निकालना और उनमें संक्रमण की पहचान कर उनका इलाज करना है।

छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना के तहत सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले को पूरी तरह कुपोषण मुक्त बनाने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। कलेक्टर के मार्गदर्शन और अनूठी पहल पर जिला प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के आपसी तालमेल से जिले में कुपोषण के खिलाफ जंग तेज कर दी गई है। 19 विशेष शिविरों का आयोजन कर 573 कुपोषित बच्चों का गहन स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।

​इस मुहिम के तहत जून माह में जिला प्रशासन द्वारा सारंगढ़, कोसीर, बरमकेला और लेन्धरा परियोजना के विभिन्न सेक्टरों में 19 विशेष शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों में 573 कुपोषित बच्चों का गहन स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जिनमें से 422 बच्चों को मौके पर ही आवश्यक दवाइयाँ वितरित की गईं। वहीं, गंभीर रूप से कुपोषित 45 बच्चों को त्वरित उपचार के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र (छत्ब्) भेजा गया है।

अधिकारियों ने संभाली कमा, बच्चों को लिया गोद

​जिले में कुपोषण दर को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को भी इस मुहिम से सीधे जोड़ा गया है। अधिकारी अब चिन्हित आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के वजन और ऊंचाई का कड़ाई से सत्यापन कर रहे हैं। साथ ही, कुपोषित बच्चों को गोद लेकर उनकी सघन निगरानी और लगातार फॉलोअप किया जा रहा है।

स्वयंसेवी संस्थाओं का मिल रहा है साथ

​सबसे ज्यादा कुपोषण प्रभावित ग्राम पंचायतों को विशेष रूप से चिन्हित किया गया है। इन क्षेत्रों में शत-प्रतिशत परिणाम हासिल करने के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और रेडक्रॉस जैसी प्रतिष्ठित स्वयंसेवी संस्थाओं का भी सक्रिय सहयोग लिया जा रहा है।

योजना का मुख्य उद्देश्य

मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना का मुख्य लक्ष्य कुपोषित और संकटग्रस्त बच्चों को कुपोषण के चक्रव्यूह से बाहर निकालना है। इसके तहत बच्चों को न केवल निःशुल्क चिकित्सीय परीक्षण और दवाइयाँ दी जाती हैं, बल्कि बाल रोग विशेषज्ञों द्वारा विशेष परामर्श की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है ताकि जिले का हर बच्चा सेहतमंद और सुपोषित बन सके।

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