क्या हर महीने ईएमआई भरना किराया देने से बेहतर फैसला है? ज्यादातर लोग मानते हैं कि अपना घर खरीदना हमेशा फायदे का सौदा होता है, लेकिन असली तस्वीर तब सामने आती है जब डाउन पेमेंट, ब्याज, मेंटेनेंस और दूसरे छिपे खर्चों का पूरा हिसाब लगाया जाता है. कई मामलों में किराए पर रहना आपकी जेब के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है. जानिए होम लोन की ईएमआई और रेंट में किस ऑप्शन से आपको मिल सकता है ज्यादा फायदा.
जब आप घर खरीदते हैं, तो सिर्फ मकान की कीमत ही नहीं चुकानी होती. इसके अलावा भी कई बड़े खर्चे होते हैं.
वन-टाइम खर्च: रजिस्ट्री, स्टांप ड्यूटी, ब्रोकरेज (दलाली) और घर का इंटीरियर/रिनोवेशन. ये सारे खर्चे मिलकर बजट को अचानक बढ़ा देते हैं.
लगातार होने वाले खर्च: हर महीने जाने वाली भारी-भरकम EMI, प्रॉपर्टी टैक्स, सोसाइटी मेंटेनेंस और इंश्योरेंस. किराया तो तय होता है, लेकिन ये खर्चे समय के साथ बढ़ते रहते हैं.
घर खरीदने में ब्याज और निवेश का नुकसान
घर खरीदने के लिए आपको एक बड़ी रकम ‘डाउन पेमेंट’ के रूप में देनी पड़ती है. यह वो पैसा है जो एक जगह लॉक हो जाता है. अगर आप इसी पैसे को म्यूचुअल फंड, स्टॉक या दूसरी जगह निवेश करते तो आपको शानदार रिटर्न मिल सकता था. इसके अलावा हर महीने मोटी ईएमआई चुकाने के बाद आपके पास अलग से निवेश करने के लिए पैसे बचते ही नहीं हैं.



