प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने श्रावंथि ग्रुप के प्रमोटर दंडामुडी वेंकटेश्वर राव (डीवी राव) और उनके सहयोगियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 284 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा किया है. ईडी ने इस मामले में डीवी राव, डी. शांति किरण और डीवी राव के भाई डी. अवनिंद्र कुमार को गिरफ्तार किया गया है. कोर्ट ने तीनों को 12 मई 2026 तक ED की हिरासत में भेज दिया है.
आरोप है कि डीवी राव के नियंत्रण वाली DJW Electric Power Projects Pvt. Ltd. ने कई संस्थाओं से फर्जी तरीके से करीब 58 करोड़ रुपये का लोन लिया था. यह मामला बैंक धोखाधड़ी और RTGS सिस्टम के दुरुपयोग से जुड़ा है. मामले की जांच की शुरुआत गुरुग्राम के सेक्टर-40 थाने में दर्ज FIR से हुई थी. बाद में इसमें ईडी ने भी हाथ डाला और कई जगह छापेमारी की.
कैसे शुरू हुआ कंपनी के खिलाफ मामला
श्रावंथी समूह मुख्य रूप से एनर्जी और इन्फ्रा सेक्टर में काम करती है. अक्टूबर, 2025 में प्रर्वतन निदेशालय ने हाइथ्रो पॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) से जुड़े 346 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी मामले में श्रावंथी समूह के प्रमोटर दांडमुडी वेंकटेश्वर राव के गुरुग्राम स्थित ठिकानों पर छापेमारी की थी. समूह के पास श्रावंथी इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड और श्रावंथी एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड नाम से दो कंपनियां हैं. ईडी ने अपनी जांच में बताया है कि साल 2013 से 2015 के बीच कंपनी के ऊपर 10 करोड़ रुपये का कर्ज हो गया था, जिसका भगुतान नहीं किया गया. यह कर्ज श्रावंथी एनर्जी के उत्तराखंड के खाइखेड़ा में 450 मेगावाट गैस आधारित पॉवर प्लांट से जुड़ा है.
कैसे किया कंपनी ने फर्जीवाड़ा
ईडी ने अपनी जांच में बताया है कि श्रावंथी इन्फ्रा ने 10 करोड़ का कर्ज 13 साल से नहीं चुकाया है. इसके अलावा 2019 से 2020 तक एसईपीएल के 18.43 करोड़ रुपये के मूल्य वाले इक्विटी शेयर जो बैंकरों के पास थे, उन्हें महज 10 रुपये की बेहद कम कीमत पर अपने विदेशी निवेशकों को भेज दिए. यह सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बनता है और अब ईडी ने इस पर शिकंजा कस लिया है.



