पश्चिम बंगाल चुनाव उरूज पर है. एक चरण का मतदान हो चुका है और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है. हर पार्टी दूसरे चरण के लिए चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक रही है. हालांकि लड़ाई सीधी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच दिख रही है. लेफ्ट और कांग्रेस अब इस चुनाव में कहीं से भी नजर नहीं आ रहे हैं. बीजेपी और TMC के बीच चुनाव मानो जंग की तरह लड़ा जा रहा है. दोनों तरफ से जुबानी जंग जारी है, साथ ही आमने-सामने कई बार टकराव की खबरें भी सामने आ रही हैं. इस बीच कल चार घंटे में ऐसा कुछ हुआ जो चुनाव के रिजल्ट को सीधे प्रभावित कर सकता है. रविवार को एक तरफ चुनाव प्रचार के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ठाकुरनगर में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली मतुआ समुदाय के मुख्य मंदिर ठाकुरबाड़ी और राजधानी कोलकाता के ऐतिहासिक ठनठनिया काली मंदिर में पूजा-अर्चना की. वहीं दूसरी तरफ कथित तौर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक चुनावी रैली के दौरान अनुसूचित जाति के खिलाफ ‘अपमानजनक’ भाषा का इस्तेमाल करती नजर आईं. ममता दीदी का वीडियो वायरल होने के बाद नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल्ड कास्ट्स (NCSC) ने नोटिस जारी कर दिया है.
कहते हैं राजनीति में टाइमिंग ही सब कुछ होती है और बंगाल में ये बात एक बार फिर साबित होती दिख रही है. एक तरफ आस्था और सांस्कृतिक जुड़ाव का संदेश देने की कोशिश तो दूसरी तरफ बयानबाजी से पैदा हुआ विवाद. दोनों घटनाएं लगभग एक ही समय में हुईं. यही वजह है कि चुनावी नैरेटिव अचानक बदलता नजर आ रहा है. छोटे-छोटे घटनाक्रम भी बड़े राजनीतिक असर डालते हैं खासकर तब जब मुकाबला सीधा और कांटे का हो. मतुआ जैसे प्रभावशाली समुदाय की भावनाएं और अनुसूचित जाति वोट बैंक की संवेदनशीलता इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकती है. ऐसे में ये चार घंटे सिर्फ घटनाओं का सिलसिला नहीं बल्कि संभावित राजनीतिक बदलाव की पटकथा भी बन सकते हैं.



