ईरान संकट की वजह से यूरिया के उत्पादन में आ रही तेज गिरावट ने किसानों में चिंता पैदा कर दी थी. मार्च में यूरिया का उत्पादन करीब 25 फीसदी गिर गया था. इसकी वजह से सरकार को 25 लाख टन यूरिया आयात का एकमुश्त ऑर्डर देना पड़ा. अब उर्वरक विभाग ने बताया कि देश में जरूरत से कहीं ज्यादा उर्वरक का भंडार बना लिया गया है, जिससे किसानों को आगामी फसल चक्र के लिए कमी नहीं होगी और उन्हें सब्सिडी पर कम कीमत वाली यूरिया, डीएपी सहित अन्य फर्टिलाइजर्स आसानी से मिलते रहेंगे.
उर्वरक विभाग ने बताया कि जून से शुरू होने वाले आगामी खरीफ बुवाई सत्र के लिए आपूर्ति को और मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त 25 लाख टन यूरिया आयात किया जा रहा है. विभाग ने बाजार में कमी के हालिया दावों को खारिज करते हुए कहा कि देशभर में भंडार की स्थिति संतोषजनक बनी है. भारत की उर्वरक सुरक्षा मजबूत, स्थिर एवं सुव्यवस्थित बनी हुई है और सभी प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता लगातार आवश्यकता से अधिक है.
पिछले साल मंगाया था 100 लाख टन यूरिया
भारत घरेलू मांग को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में उर्वरकों का आयात करता है. गत वित्त वर्ष में देश ने 100 लाख टन से अधिक यूरिया का आयात किया था. इस साल रिकॉर्ड 25 लाख टन का ऑर्डर एकमुश्त दिया गया है. खरीफ फसलों की बुवाई जून से दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के साथ शुरू होती है. पिछले वर्ष की तुलना से भी भंडार की बेहतर स्थिति स्पष्ट होती है. लिहाजा किसानों को इस बार यूरिया अथवा अन्य किसी फर्टिलाइजर्स को लेकर दिक्कत नहीं आएगी.
भारत घरेलू मांग को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में उर्वरकों का आयात करता है. गत वित्त वर्ष में देश ने 100 लाख टन से अधिक यूरिया का आयात किया था. इस साल रिकॉर्ड 25 लाख टन का ऑर्डर एकमुश्त दिया गया है. खरीफ फसलों की बुवाई जून से दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के साथ शुरू होती है. पिछले वर्ष की तुलना से भी भंडार की बेहतर स्थिति स्पष्ट होती है. लिहाजा किसानों को इस बार यूरिया अथवा अन्य किसी फर्टिलाइजर्स को लेकर दिक्कत नहीं आएगी.



