ममता बनर्जी ने वामपंथियों के 34 साल पुराने गढ़ को अपने एक जादुई नारे ‘मां, माटी और मानुष’ के दम पर जमींदोज कर दिया था. इसी नारे की बदौलत वह लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनीं. लेकिन अब बंगाल के चुनावी रण में ममता का तिलिस्म तोड़ने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘रोटी, बेटी और माटी’ का ब्रह्मास्त्र चल दिया है. यह कोई तुकबंदी नहीं है. इसके पीछे एक बहुत गहरी और सोची-समझी रणनीति है.
राजनीति में जब एंटी इनकमबेंसी चरम पर होती है, तो पुराने नारे अपना असर खोने लगते हैं. पीएम मोदी ने कोलकाता की रैली में सबसे पहला वार इसी बात पर किया. उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि जिस ‘मां, माटी, मानुष’ के नाम पर टीएमसी सत्ता में आई थी, आज वह पूरी तरह विफल है. उन्होंने इस नारे की जमीनी हकीकत बताते हुए कहा- आज बंगाल में मां रो रही है, माटी को लूटा जा रहा है और बंगाली मानुष अपना ही राज्य छोड़ने पर मजबूर हो रहा है. पीएम मोदी का यह बयान आम बंगाली को यह अहसास दिलाने की कोशिश है कि जिस नारे पर उसने आंख बंद करके भरोसा किया था, वह असल में एक राजनीतिक छलावा साबित हुआ है. इस खालीपन को भरने के लिए ही मोदी ‘रोटी-बेटी-माटी’ का नया विकल्प लेकर आए हैं.



